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बाल संरक्षण आयोग के सचिव की नियुक्ति पर सवाल, पूर्व अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

बाल संरक्षण आयोग के सचिव की नियुक्ति पर सवाल, पूर्व अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

रायपुर, 30 सितंबर 2019

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सचिव पद पर पीसीएस अफसर की नियुक्ति अब सवालों के घेरे में आ गई है. आयोग में सदस्यों की नियुक्ति को लेकर एक बार पहले भी राज्य सरकार को पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना वहन करना पड़ा था.

उत्तराखंड राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व अध्यक्ष योगेंद्र खंडूरी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद सिंह रावत को पत्र लिखकर आयोग में सचिव पद पर पीसीएस अधिकारी की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाया है. खंडूरी का कहना है कि बाल संरक्षण अधिनियम केंद्रीय अधिनियम है और बाल संरक्षण आयोग में नियुक्तियां सहित अन्य मामलों में केंद्रीय अधिनियम के प्रावधान प्रभावी होते हैं. इन नियमों में साफ है कि आयोग के सचिव पद पर राज्य सरकार के सचिव स्तर से निचले स्तर के अधिकारी को नियुक्त नही किया जा सकता है. 

अधिनियम की धारा 21 (1) में यह पूरी तरह से स्पष्ट भी किया गया है. अधिनियम यह भी कहता है कि आयोग को पूरी सक्षमता से काम करने देने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति राज्य सरकार को करनी होगी. सरकार ने आयोग के सचिव पद पर पीसीएस अधिकारी की नियुक्ति की है जो सरासर गलत है. 

बता दें कि पूर्व में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्यों की नियुक्ति समय से न होने पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार पर पच्चीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था. आयोग के पूर्व अध्यक्ष खंडूरी के मुताबिक सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति की वजह ही यही है कि आयोग का काम पूरी संवेदनशीलता से हो और केंद्र और राज्य के बीच समन्वय बना रहे.