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सुर्खियों में कलेक्टर अवनीश शरण की ये फेसबुक पोस्ट, जानिए- क्या लिखा उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में 10 वर्ष पूरे होने पर…

सुर्खियों में कलेक्टर अवनीश शरण की ये फेसबुक पोस्ट, जानिए- क्या लिखा उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा में 10 वर्ष पूरे होने पर…

रायपुर, 31 अगस्त 2019

अपने अच्छे कामों की वजह से अक्सर सुर्खियों में रहने वाले छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के कलेक्टर अवनीश शरण इस बार अपने अलग अंदाज के कारण सुर्खियों में हैं. कबीरधाम जैसे आदिवासी बहुल जिले में तैनात अवनीश शरण हमेशा से ही लोगों में खास बने रहते हैं, चाहे वो जनहित के मुद्दे हों या अपने सहज-सरल स्वभाव और ग्रामीणों से सीधे भेंट-मुलाकात, गाँवों में लगातार दौरा करने को लेकर हो.

रायपुर नगर निगम आयुक्त रहते हुए भी उन्होंने अपने विशेष कामों से खस्ताहाल पड़े निगम को विकास की राह में लाने कोई कोर कसर नही छोड़ी थी. जब वे बलरामपुर कलेक्टर रहते अपनी बेटी को पहले आंगनबाड़ी और फिर सरकारी स्कूल में प्रवेश कराया तो लोगों ने उनकी जमकर तारीफें भी की. पिछले दिनों ही उन्होंने जिला खनिज न्यास के माध्यम से जिले में IIT, मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओ की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए विषय विशेषज्ञों हेतु विज्ञापन जारी किया था. खैर उनकी पुरानी बातों से अलग अब उनके इस नये अंदाज की चर्चा करते हैं.

उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा के तौर पर अपने 10 वर्ष के कार्यकाल पूरा करने पर फेसबुक में जो पोस्ट किया है, जो हम आपको अब दिखाते हैं

बधाई 2009 बैच. भारतीय प्रशासनिक सेवा में 10 वर्ष पूरे होने की!

साल 2009 में आज के ही दिन हमने मसूरी स्थित अपनी एकेडमी ज्वाइन की थी. इन दस वर्षों का वस्तुनिष्ठ आकलन किया जाना बहुत कठिन है, लेकिन जिस सपने को लेकर मैं सेवा में आया था आज अगर उसको सोचता हूँ तो एक संतुष्टि का भाव ज़रूर आता है. मेरे हिसाब से किसी भी लोक सेवा में आपकी सफलता-असफलता या उस सेवा की महत्ता 3-4 बातों से आकलित की जानी चाहिए: अवसर, कार्य की व्यापकता, सिस्टम में बदलाव लाने या योगदान देना और आत्म- संतुष्टि का भाव. अगर इन कसौटियों पर ‘भारतीय प्रशासनिक सेवा’ को रखकर देखा जाए तो ये उनपर खरा उतरता है. 

क्या कभी कल्पना किया जा सकता है कि कोई ऐसा व्यक्ति जो ख़ुद कभी परीक्षा में 70% मार्कस ना लाया हो, “mission90” के माध्यम से अपने जिले के स्टूडेंट्स के लिए प्रयास करे...इंजीनियर बनने का सपना पूरा ना कर पाने के बाद इंजीनियर और डाक्टर बनाने वाली परीक्षा के लिए कोचिंग शुरू करे. ये सब अवसर भारतीय प्रशासनिक सेवा ही दिला पाती है, जिसके माध्यम से सरकार की योजनाओं के द्वारा आप ये सब कर सकते हैं. 

अपने कार्यक्षेत्र में यह सेवा इतना व्यापक है कि समाज का कोई ऐसा वर्ग, क्षेत्र नहीं जिसको ये प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित ना करे. कभी service delivery के माध्यम से, कभी law न order, कभी regulatory work, कभी योजना बनाना, उनको सफलता से लागू करने मे योगदान देना; SDM, Municipal Commissioner, CEO ज़िला पंचायत, director, Collector...10 साल की सेवा में इतना व्यापक कार्यक्षेत्र कोई और सेवा उपलब्ध नहीं कराती. 

कोई भी ‘सिस्टम’ उसको चलाने या लागू करने वालों पर निर्भर करता है. अपनी बहुत सी कमियों के बावजूद सरकारी सिस्टम आज भी बेस्ट है, यह कहा जा सकता है. इस बात को किसी ‘crisis’ के समय और अधिक महसूस किया जा सकता है. ज़रूरत है बस समय के साथ और अधिक उत्तरदायी और पारदर्शी बनाने की. 

इस सेवा के माध्यम से हम समाज के बहुत बड़े वर्ग के सीधे सम्पर्क में आते है और उनके लिए बहुत कुछ सकारात्मक कर सकते हैं. मुझे अपने 10 साल की सेवा मे बहुत सारे मौक़े मिले जो और कोई ‘Private Job’ उपलब्ध नहीं करा सकता था. कभी किसी कलेक्टर से प्रत्यक्ष रूप से मिला नहीं था, लेकिन इस सेवा ने ये मौक़ा दिया कि ख़ुद वैसे लोगों तक पहुँचकर उनको क़रीब से जानने का प्रयास किया. आज मुझे सेवा को लेकर ‘आत्मसंतुष्टि’ का भाव है जो मेरे हिसाब से किसी भी नौकरी के लिए आवश्यक है. आज भी लाखों प्रतिभागी इस सेवा में आने के लिए प्रयासरत हैं और हर साल 10 लाख प्रतिभागी परीक्षा देते हैं.

आज “अज्ञेय” द्वारा अनुदित “शेलि” की ये कविता मुझे याद आती है: 

“कई हरे-भरे द्वीप अवश्य ही रहे होंगे,

इस व्यथा के गहरे और फैले सागर में,

नहीं तो थका हारा सागरिक...

ऐसे यात्रा करना नहीं कह सकता.”

फ़ोटो: 31 अगस्त 2009, गंगा हॉस्टल, LBSNAA, मसूरी