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सरल, सहज और संवेदनशीलता के साथ करें बच्चों के मामलों का निराकरण: श्रीमती प्रभा दुबे

सरल, सहज और संवेदनशीलता के साथ करें बच्चों के मामलों का निराकरण: श्रीमती प्रभा दुबे

बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती प्रभा दुबे ने पुलिस विभाग व ICPS के कार्यों की समीक्षा की

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मंत्रालय महानदी भवन में विशेष किशोर पुलिस इकाई (एस.जे.पी.यू.) व महिला एवं बाल विकास विभाग के I.C.P.S के जिलास्तरीय नोडल अफसरों के साथ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा की गई। आयोग की अध्यक्ष श्रीमती प्रभा दुबे ने बच्चों से जुड़े मामलों में सरल, सहज और संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की बात कही। उन्होंने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम-2015 एवं पॉक्सो एक्ट-2012 का बेहतर क्रियान्वयन तभी संभव है, जब बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों में कमी आयेगी। उन्होंने पुलिस के संपर्क में आने वाले बच्चों के साथ कड़ाई से पूछताछ न कर संवेदनशीलता से व्यवहार करने की सलाह अधिकारियों को दी, ताकि बालमन पर इसका विपरीत असर न पड़े। श्रीमती दुबे ने सभी अधिकारियों को अपने थाना क्षेत्रों, स्कूल, सार्वजनिक स्थलों एवं ग्रामीण अंचलों में अधिक से अधिक जनजागरूकता कार्यक्रम करने की बात पर जोर दिया, जिससे होनी वाली घटनाओं की रोकथाम समय पूर्व की जा सके।


श्रीमती दुबे ने लघु अपराधों में कमी लाने व लंबित प्रकरणों के शीघ्र निबटारे के निर्देश दिये। साथ ही गुमशुदा बच्चों की घर वापसी व बेहतर पुनर्वास पर विशेष कार्ययोजना तैयार करने भी निर्देश दिये। साथ ही बाल विवाह के रोकथाम की स्थिति पर चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित विभाग के अधिकारियों ने बच्चों से जुड़ी योजनाओं पर प्रकाश डाला। साथ ही आयोग की अनुशंसा पर प्रत्येक जिले के 4 और 5 पुलिस थानों को मॉडल के रूप में "बालमित्र थाना" बनाया गया है। वीडियो कान्फ्रेंसिंग में आयोग के सचिव श्री प्रतीक खरे एवं पुलिस विभाग से श्री रवि सिंह आदि उपस्थित थे।